हम मृत्यु के बाद कहाँ जाते हैं?

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लाखों लोगों का मानना ​​है कि आत्मा के पास स्वाभाविक अमरता है, लेकिन बाइबल में एक बार भी आत्मा को अमर या अन्नत नहीं कहा गया है। परमेश्वर के वचन के अनुसार, मनुष्य नाशवान है (अय्यूब 4:17) केवल परमेश्वर अमर है (1 तीमुथियुस 6:15,16)। पवित्रशास्त्र हमें सिखाता है कि जब कोई व्यक्ति इस जीवन को छोड़ देता है, तो वह कब्र में सोता है (यूहन्ना 11:11; दानिय्येल 12: 2; भजन संहिता 13: 3) जब तक कि दुनिया का अंत न हो।

मृत्यु के बाद

मृत्यु में, कोई व्यक्ति किसी भी तरह की गतिविधि या ज्ञान से पूरी तरह से विवेकरहित है। एक व्यक्ति: मिटटी में मिल जाता है (भजन संहिता 104: 29), कुछ भी नहीं जानता (सभोपदेशक 9: 5), कोई मानसिक शक्ति नहीं रखता है (भजन संहिता 146: 4), पृत्वी पर करने के लिए कुछ भी नहीं है (सभोपदेशक 9: 6), जीवित नहीं रहता है (2 राजा 20:1), कब्र में प्रतीक्षा करता है (अय्यूब 17:13), और पुनरूत्थान (प्रकाशितवाक्य 22:12) तक निरंतर नहीं रहता है (अय्यूब 14:1,2) ;1 थिस्सलुनीकियों 4:16, 17:1, 15: 51-53) तब उसे उसका प्रतिफत या सजा दी जाएगी (प्रकाशितवाक्य 22:12)।

जीवन और मृत्यु

बुद्धिमान सुलेमान ने बताया कि मृत्यु के समय क्या होता है, “जब मिट्टी ज्यों की त्यों मिट्टी में मिल जाएगी, और आत्मा परमेश्वर के पास जिसने उसे दिया लौट जाएगी” (सभोपदेशक 12: 7)। और चूंकि मृत्यु जीवन के विपरीत है। आइए देखें कि सृष्टि में क्या होता है, “और यहोवा परमेश्वर ने आदम को भूमि की मिट्टी से रचा और उसके नथनों में जीवन का श्वास फूंक दिया; और आदम जीवता प्राणी बन गया ”(उत्पत्ति 2: 7)।

ध्यान दें: हिंदी में अंग्रेजी भाषा के दो शब्दों का एक ही अर्थ है :

(1) Spirit – आत्मा (श्वांस)

(2) Soul – आत्मा (प्राणी)

जीवन:

शरीर (मिटटी) + जीवन का श्वांस (या आत्मा) = जीवन (प्राणी)

मौत:

शरीर (मिटटी) – जीवन का श्वांस (या आत्मा) = मृत्यु (कोई प्राणी नहीं)

आत्मा (प्राणी)

इस प्रकार, आत्मा (प्राणी) बस विवेक जीवन है जो परिणामस्वरूप हुआ जब परमेश्वर ने शरीर में सांस (जीवन की ईश्वरीय चिंगारी) को जोड़ा। ध्यान दें कि शब्द “सांस” और “आत्मा” का प्रयोग एक दूसरे के स्थान पर किया जाता है (अय्यूब 27: 3; भजन संहिता 104: 29; 30; याकूब 2:26)। उत्पत्ति 7: 21,22 में जानवरों के लिए इसी शब्द “जीवन की सांस” का उपयोग किया जाता है।

जीवन की आत्मा या श्वास

इसलिए, जब सुलैमान ने आत्मा को परमेश्वर के पास लौटने का वर्णन किया, तो वह सांस का हवाला दे रहा था, क्योंकि वह वही थी जिसे परमेश्वर ने शुरुआत में दिया था, और इसलिए, यह केवल एक चीज थी, जो उसके पास वापिस लौट जाती है जिसने उसे दिया था। मृत्यु पर परमेश्वर के पास लौटने वाली आत्मा जीवन का सांस है। पवित्रशास्त्र कहीं भी किसी व्यक्ति के मरने के बाद  “आत्मा” का जीवन, ज्ञान या भावना नहीं दर्शाता है। यह “जीवन की सांस” है और इससे ज्यादा कुछ नहीं।

मृत्यु के विषय पर अधिक जानकारी के लिए, निम्नलिखित लिंक देखें:

परमेश्वर की सेवा में,
BibleAsk टीम

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