फिलिप्पियों 2:3-4

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3 स्वार्थ या मिथ्यागर्व के लिये कुछ न करो, पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो।

4 हर एक अपने ही हित की नहीं, वरन् दूसरों के हित की भी चिन्ता करे।

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