विश्राम की आज्ञा तो सब्त के विश्राम के विषय बात करती है लेकिन आराधना की नहीं। तो, क्या सब्त के दिन गिरिजाघर जाना ज़रूरी है?

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सब्त आज्ञा विश्राम और आराधना की बात करती है

“छ: दिन कामकाज किया जाए, पर सातवां दिन परमविश्राम का और पवित्र सभा का दिन है; उस में किसी प्रकार का कामकाज न किया जाए; वह तुम्हारे सब घरों में यहोवा का विश्राम दिन ठहरे।” (लैव्यव्यवस्था 23: 3)। शब्द “सभा” हिब्रू शब्द मिखरा से है, जिसका अर्थ है एक सार्वजनिक बैठक, सभा या इकट्ठा होना है।  इसलिए, सब्त पवित्र सभाओं या उपासना सेवाओं के लिए एक समय है।

इसके अलावा, यशायाह भविष्यद्वक्ता ने सब्त के दिन आराधना के बारे में लिखा था। उसने कहा, “फिर ऐसा होगा कि एक नये चांद से दूसरे नये चांद के दिन तक और एक विश्राम दिन से दूसरे विश्राम दिन तक समस्त प्राणी मेरे साम्हने दण्डवत करने को आया करेंगे; यहोवा का यही वचन है॥” (यशायाह 66:23)।

सब्त को आराधना के साथ जोड़ने का मुख्य कारण यीशु का उदाहरण है

  • “और वे कफरनहूम में आए, और वह तुरन्त सब्त के दिन सभा के घर में जाकर उपदेश करने लगा” (मरकुस 1:21)।
  • “सब्त के दिन वह आराधनालय में उपदेश करने लगा; और बहुत लोग सुनकर चकित हुए और कहने लगे, इस को ये बातें कहां से आ गईं? और यह कौन सा ज्ञान है जो उस को दिया गया है? और कैसे सामर्थ के काम इसके हाथों से प्रगट होते हैं?” (मरकुस 6:2।
  • “और वह नासरत में आया; जहां पाला पोसा गया था; और अपनी रीति के अनुसार सब्त के दिन आराधनालय में जा कर पढ़ने के लिये खड़ा हुआ” (लूका 4:16)।
  • “और ऐसा हुआ कि किसी और सब्त के दिन को वह आराधनालय में जाकर उपदेश करने लगा; और वहां एक मनुष्य था, जिस का दाहिना हाथ सूखा था” (लुका 6: 6)।

बार-बार, हम यीशु को सब्त के दिन आराधनालय में देखते हैं। हमने यह भी बताया कि यह उस दिन वहां आने की उनकी रीति  थी।

यीशु के उदाहरण में शिष्यों ने भी अनुसरण किया

  • “और पिरगा से आगे बढ़कर के पिसिदिया के अन्ताकिया में पहुंचे; और सब्त के दिन अराधनालय में जाकर बैठ गए” (प्रेरितों 13:14)।
  • “उन के बाहर निकलते समय लोग उन से बिनती करने लगे, कि अगले सब्त के दिन हमें ये बातें फिर सुनाईं जाएं” (प्रेरितों के काम 13:42)।
  • “और वह हर एक सब्त के दिन आराधनालय में वाद-विवाद करके यहूदियों और यूनानियों को भी समझाता था” (प्रेरितों के काम 18:4)।

अंत में, प्रभु ने कहा, “और प्रेम, और भले कामों में उक्साने के लिये एक दूसरे की चिन्ता किया करें। और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना ने छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें; और ज्यों ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों त्यों और भी अधिक यह किया करो।”

विभिन्न विषयों पर अधिक जानकारी के लिए हमारे बाइबल उत्तर पृष्ठ देखें।

 

परमेश्वर की सेवा में,
BibleAsk टीम

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