यीशु द्वारा भेजे गए सत्तर शिष्य कौन थे?

सत्तर शिष्य बारह मूल प्रेरितों के अतिरिक्त थे जिन्हें यीशु ने चुना था। लूका का सुसमाचार एकमात्र पुस्तक है जिसमें उल्लेख है कि यीशु ने सत्तर शिष्यों को भेजा था।

“इन बातों के बाद प्रभु ने सत्तर और मनुष्य नियुक्त किए और जिस जिस नगर और जगह को वह आप जाने पर था, वहां उन्हें दो दो करके अपने आगे भेजा” (लुका 10: 1)।

तथ्य यह है कि सत्तर शिष्यों का फिर से उल्लेख नहीं है, तात्पर्य है कि यह एक अस्थायी नियुक्ति थी।

भूमिका

ऐसा लगता है कि नियुक्ति परेया में हुई थी, लेकिन यह कि सत्तर को पहले सामरिया के क्षेत्र में भेजा गया था। यीशु ने पहले कहा था, “और मेरी और भी भेड़ें हैं, जो इस भेड़शाला की नहीं; मुझे उन का भी लाना अवश्य है, वे मेरा शब्द सुनेंगी; तब एक ही झुण्ड और एक ही चरवाहा होगा” (यूहन्ना 10:16)। अब उसने इन खोई हुई भेड़ों में से कुछ को खोजने के लिए सत्तर को भेजा। सत्तर के तीसरे गलीली दौरे पर यीशु के साथ गए थे। यह यहाँ था कि बारह अपने पहले मिशन पर आगे बढ़े थे, गलीली में दो-दो करके बीमार को चंगे करते और दुष्टातमा को निकालते हुए गए।  (मति 10: 1-42; लुका 9: 1-6)।

मिशन

यीशु ने सत्तर को जो निर्देश दिए थे, वे पहले के बारह के समान थे। उसने कहा, “जाओ; देखों मैं तुम्हें भेड़ों की नाईं भेडियों के बीच में भेजता हूं। इसलिये न बटुआ, न झोली, न जूते लो; और न मार्ग में किसी को नमस्कार करो। जिस किसी घर में जाओ, पहिले कहो, कि इस घर पर कल्याण हो। यदि वहां कोई कल्याण के योग्य होगा; तो तुम्हारा कल्याण उस पर ठहरेगा, नहीं तो तुम्हारे पास लौट आएगा। उसी घर में रहो, और जो कुछ उन से मिले, वही खाओ पीओ, क्योंकि मजदूर को अपनी मजदूरी मिलनी चाहिए: घर घर न फिरना। और जिस नगर में जाओ, और वहां के लोग तुम्हें उतारें, तो जो कुछ तुम्हारे साम्हने रखा जाए वही खाओ। वहां के बीमारों को चंगा करो: और उन से कहो, कि परमेश्वर का राज्य तुम्हारे निकट आ पहुंचा है। परन्तु जिस नगर में जाओ, और वहां के लोग तुम्हें ग्रहण न करें, तो उसके बाजारों में जाकर कहो। कि तुम्हारे नगर की धूल भी, जो हमारे पांवों में लगी है, हम तुम्हारे साम्हने झाड़ देते हैं, तौभी यह जान लो, कि परमेश्वर का राज्य तुम्हारे निकट आ पहुंचा है। मैं तुम से कहता हूं, कि उस दिन उस नगर की दशा से सदोम की दशा सहने योग्य होगी” (लुका 10: 3-12)।

यह जानना दिलचस्प है कि नए नियम में यीशु ने अपने वचन को तैयार करने और उपदेश देने के लिए 70 पुरुषों को नियुक्त किया। और पुराने नियम में, मूसा ने इस्राएल को न्याय करने में सहायता करने के लिए 70 लोगों को भी नियुक्त किया (निर्गमन 24: 1; गिनती 11:16)।

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परमेश्वर की सेवा में,
BibleAsk टीम

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