यदि यहोशू 10 में सूर्य स्थिर रहा, तो क्या इसका अर्थ यह हुआ कि हर जगह सुनामी थी?

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सूर्य स्थिर रहा

“जब यरूशलेम के राजा अदोनीसेदेक ने सुना कि यहोशू ने ऐ को ले लिया, और उसको सत्यानाश कर डाला है, और जैसा उसने यरीहो और उसके राजा से किया है, और यह भी सुना कि गिबोन के निवासियों ने इस्राएलियों से मेल किया, और उनके बीच रहने लगे हैं,

2 तब वे निपट डर गए, क्योंकि गिबोन बड़ा नगर वरन राजनगर के तुल्य और ऐ से बड़ा था, और उसके सब निवासी शूरवीर थे।

3 इसलिये यरूशलेम के राजा अदोनीसेदेक ने हेब्रोन के राजा होहाम, यर्मूत के राजा पिराम, लाकीश के राजा यापी, और एग्लोन के राजा दबीर के पास यह कहला भेजा,

4 कि मेरे पास आकर मेरी सहायता करो, और चलो हम गिबोन को मारें; क्योंकि उसने यहोशू और इस्राएलियों से मेल कर लिया है।

5 इसलिये यरूशलेम, हेब्रोन, यर्मूत, लाकीश, और एग्लोन के पांचों एमोरी राजाओं ने अपनी अपनी सारी सेना इकट्ठी करके चढ़ाई कर दी, और गिबोन के साम्हने डेरे डालकर उस से युद्ध छेड़ दिया।

6 तक गिबोन के निवासियों ने गिलगाल की छावनी में यहोशू के पास यों कहला भेजा, कि अपने दासों की ओर से तू अपना हाथ न हटाना; शीघ्र हमारे पास आकर हमें बचा ले, और हमारी सहायता कर; क्योंकि पहाड़ पर रहने वाले एमोरियों के सब राजा हमारे विरुद्ध इकट्ठे हए हैं।

7 तब यहोशू सारे योद्धाओं और सब शूरवीरों को संग ले कर गिलगाल से चल पड़ा।

8 और यहोवा ने यहोशू से कहा, उन से मत डर, क्योंकि मैं ने उन को तेरे हाथ में कर दिया है; उन में से एक पुरूष भी तेरे साम्हने टिक न सकेगा।

9 तब यहोशू रातोरात गिलगाल से जा कर एकाएक उन पर टूट पड़ा।

10 तब यहोवा ने ऐसा किया कि वे इस्राएलियों से घबरा गए, और इस्राएलियों ने गिबोन के पास उनका बड़ा संहार किया, और बेथोरान के चढ़ाव पर उनका पीछा करके अजेका और मक्केदा तक उन को मारते गए।

11 फिर जब वे इस्राएलियों के साम्हने से भागकर बेथोरोन की उतराई पर आए, तब अजेका पहुंचने तक यहोवा ने आकाश से बड़े बड़े पत्थर उन पर बरसाए, और वे मर गए; जो ओलों से मारे गए उनकी गिनती इस्राएलियों की तलवार से मारे हुओं से अधिक थी॥

12 और उस समय, अर्थात जिस दिन यहोवा ने एमोरियों को इस्राएलियों के वश में कर दिया, उस दिन यहोशू ने यहोवा से इस्राएलियों के देखते इस प्रकार कहा, हे सूर्य, तू गिबोन पर, और हे चन्द्रमा, तू अय्यालोन की तराई के ऊपर थमा रह॥

13 और सूर्य उस समय तक थमा रहा;

और चन्द्रमा उस समय तक ठहरा रहा,

जब तक उस जाति के लोगों ने अपने शत्रुओं से पलटा न लिया॥ क्या

यह बात याशार नाम पुस्तक में नहीं लिखी है

कि सूर्य आकाशमण्डल के बीचोबीच ठहरा रहा,

और लगभग चार पहर तक न डूबा?

14 न तो उस से पहिले कोई ऐसा दिन हुआ और न उसके बाद, जिस में यहोवा ने किसी पुरूष की सुनी हो; क्योंकि यहोवा तो इस्राएल की ओर से लड़ता था॥

15 तब यहोशू सारे इस्राएलियों समेत गिलगाल की छावनी को लौट गया॥

चमत्कारी कार्य

यहोशू 10 में हुए चमत्कार के बारे में, मनुष्य के पास अक्सर सृष्टिकर्ता के बारे में सीमित विचार होते हैं। वे सोच सकते हैं कि वह प्राकृतिक नियमों को नियंत्रित करने के लिए शक्तिहीन है। वे देख सकते हैं कि प्रकृति में किसी भी परिवर्तन का पृथ्वी पर ही विनाशकारी प्रभाव होगा (उदाहरण के लिए सुनामी का कारण) और संभवतः अन्य स्वर्गीय निकायों पर।

क्या यहोशू 10 में सूर्य के रुकने की घटना प्रकाश के मोड़ से उत्पन्न हुई थी या किसी अन्य तरीके से जो मनुष्यों के लिए अज्ञात थी, तथ्य यह है कि यहोशू के समय में किसी प्रकार का चमत्कार हुआ था। और यदि हम एक सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करते हैं, जो सृष्टिकर्ता और पालनकर्ता के रूप में अपनी सृष्टि के कार्यों को नियंत्रित करता है, तो उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं है (यूहन्ना 19:26)।

यह चमत्कार इस्राएल के परमेश्वर की शक्ति का एक उदाहरण था। इससे पता चलता है कि जिन देवताओं की मूर्तिपूजा करते थे वे ही ऐसे चमत्कार करने में असमर्थ थे। कनानियों ने बाल देवता और देवी अश्तोरेत की पूजा की। सूर्य और चंद्रमा दोनों, जिनकी वे उपासना करते थे, इस्राएल के परमेश्वर – यहोवा के अधीन होने के लिए दिखाए गए थे।

 

परमेश्वर की सेवा में,
BibleAsk टीम

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