(45) भविष्यद्वाणी के उपहार

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भविष्यद्वाणी के उपहार

1.परमेश्वर ने अदन में मनुष्य के साथ कैसे संवाद किया?
“तब यहोवा परमेश्वर ने पुकार कर आदम से पूछा, तू कहां है? (उत्पति 3:9)।

2.पतन के बाद से, किस माध्यम से परमेश्वर ने आम तौर पर मनुष्य को अपनी इच्छा से अवगत कराया है?
“मैं ने भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा बातें कीं, और बार बार दर्शन देता रहा; और भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा दृष्टान्त कहता आया हूं।” (होशे 12:10)।

3.कौन-सी चीज़ें परमेश्‍वर की हैं, और हमारे लिए क्या हैं?
“गुप्त बातें हमारे परमेश्वर यहोवा के वश में हैं; परन्तु जो प्रगट की गई हैं वे सदा के लिये हमारे और हमारे वंश में रहेंगी, इसलिये कि इस व्यवस्था की सब बातें पूरी ही जाएं॥” (व्यवस्थाविवरण 29:29)।

4.परमेश्वर अपने उद्देश्यों को पूरी तरह से और किसके सामने प्रकट करता है?
“इसी प्रकार से प्रभु यहोवा अपने दास भविष्यद्वक्ताओं पर अपना मर्म बिना प्रकट किए कुछ भी न करेगा।” (आमोस 3:7)।

5.क्या दुनिया के बुद्धिमान भविष्य की भविष्यद्वाणी कर सकते हैं?
“दानिय्येल ने राजा का उत्तर दिया, जो भेद राजा पूछता है, वह न तो पण्डित न तन्त्री, न ज्योतिषी, न दूसरे भावी बताने वाले राजा को बता सकते हैं” ( दानिय्येल 2:27)। इस पुस्तक के अध्याय 47 के प्रश्न 6 की टिप्पणी देखें।

6.दानिय्येल ने कहा कि कौन रहस्य प्रकट कर सकता है?
“परन्तु भेदों का प्रगटकर्त्ता परमेश्वर स्वर्ग में है; और उसी ने नबूकदनेस्सर राजा को जताया है कि अन्त के दिनों में क्या क्या होने वाला है। तेरा स्वपन और जो कुछ तू ने पलंग पर पड़े हुए देखा, वह यह है” (पद 28)।

7.भविष्यद्वक्ता दानिय्येल ने कैसे मानव बुद्धि की अपर्याप्तता को स्वीकार किया?
“मुझ पर यह भेद इस कारण नहीं खोला गया कि मैं और सब प्राणियों से अधिक बुद्धिमान हूं, परन्तु केवल इसी कारण खोला गया है कि स्वपन का फल राजा को बताया जाए, और तू अपने मन के विचार समझ सके॥” (पद 30)।

8.स्वप्न को प्रकट करने और उसकी व्याख्या करने के बाद, दानिय्येल ने क्या कहा?
“जैसा तू ने देखा कि एक पत्थर किसी के हाथ के बिन खोदे पहाड़ में से उखड़ा, और उसने लोहे, पीतल, मिट्टी, चान्दी, और सोने को चूर चूर किया, इसी रीति महान् परमेश्वर ने राजा को जताया है कि इसके बाद क्या क्या होने वाला है। न स्वप्न में और न उसके फल में कुछ सन्देह है॥” (पद 45)।

9.परमेश्वर अपना पूर्वज्ञान कैसे दिखाता है?
“देखो, पहिली बातें तो हो चुकी हैं, अब मैं नई बातें बताता हूं; उनके होने से पहिले मैं तुम को सुनाता हूं॥” (यशायाह 42:9)।

10.यहोवा अपने भविष्यद्वक्ताओं पर स्वयं को कैसे प्रकट करता है?
“तब यहोवा ने कहा, मेरी बातें सुनो: यदि तुम में कोई नबी हो, तो उस पर मैं यहोवा दर्शन के द्वारा अपने आप को प्रगट करूंगा, वा स्वप्न में उससे बातें करूंगा।” (गिनती 12:6)।

11.प्राचीन भविष्यद्वक्‍ता किस प्रभाव में बोलते थे?
“क्योंकि कोई भी भविष्यद्वाणी मनुष्य की इच्छा से कभी नहीं हुई पर भक्त जन पवित्र आत्मा के द्वारा उभारे जाकर परमेश्वर की ओर से बोलते थे॥” (2 पतरस 1:21; 2 शमुएल 23:2)।

12.भविष्यद्वाणी की उत्पत्ति और इसे संप्रेषित करने के साधन दोनों को और आगे कैसे दिखाया गया है?
“यीशु मसीह का प्रकाशितवाक्य जो उसे परमेश्वर ने इसलिये दिया, कि अपने दासों को वे बातें, जिन का शीघ्र होना अवश्य है, दिखाए: और उस ने अपने स्वर्गदूत को भेज कर उसके द्वारा अपने दास यूहन्ना को बताया।” (प्रकाशितवाक्य 1:1)।

13.किस स्वर्गदूत ने दानिय्येल को अपने दर्शन और स्वप्न बताए?
21 तब वह पुरूष जिब्राएल जिस मैं ने उस समय देखा जब मुझे पहिले दर्शन हुआ था, उसने वेग से उड़ने की आज्ञा पाकर, सांझ के अन्नबलि के समय मुझ को छू लिया; और मुझे समझाकर मेरे साथ बातें करने लगा। 22 उसने मुझ से कहा, हे दानिय्येल, मैं तुझे बुद्धि और प्रविणता देने को अभी निकल आया हूं।” (दानिय्येल 9:21,22; अध्याय 10, और प्रकाशितवाक्य 22:9,10 भी देखें)।

14.भविष्यद्वक्ताओं में कौन-सी आत्मा थी जो उनकी बातों का संकेत देती थी?
10 इसी उद्धार के विषय में उन भविष्यद्वक्ताओं ने बहुत ढूंढ़-ढांढ़ और जांच-पड़ताल की, जिन्हों ने उस अनुग्रह के विषय में जो तुम पर होने को था, भविष्यद्वाणी की थी। 11 उन्होंने इस बात की खोज की कि मसीह का आत्मा जो उन में था, और पहिले ही से मसीह के दुखों की और उन के बाद होने वाली महिमा की गवाही देता था, वह कौन से और कैसे समय की ओर संकेत करता था।” (1 पतरस 1:10,11)।

15.भविष्यद्वक्ताओं से कहे गए यहोवा के वचन कैसे सुरक्षित रखे गए?
“बाबुल के राजा बेलशस्सर के पहिले वर्ष में, दानिय्येल ने पलंग पर स्वप्न देखा। तब उसने वह स्वप्न लिखा, और बातों का सारांश भी वर्णन किया।” (दानिय्येल 7:1; यिर्मयाह 51:60; प्रकाशितवाक्य 1:10,11)।

16.इन अंतिम दिनों में परमेश्वर ने हम से किसके द्वारा बातें की हैं?
“पूर्व युग में परमेश्वर ने बाप दादों से थोड़ा थोड़ा करके और भांति भांति से भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा बातें कर के। इन दिनों के अन्त में हम से पुत्र के द्वारा बातें की, जिसे उस ने सारी वस्तुओं का वारिस ठहराया और उसी के द्वारा उस ने सारी सृष्टि रची है।” (इब्रानियों 1:1,2)।

17.मसीहा द्वारा भरे जाने वाले पदों में से एक क्या था?
“तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे मध्य से, अर्थात तेरे भाइयों में से मेरे समान एक नबी को उत्पन्न करेगा; तू उसी की सुनना;” (व्यवस्थाविवरण  18:15)।

18.योएल नबी के ज़रिए क्या भविष्यद्वाणी की गयी थी?
“उन बातों के बाद मैं सब प्राणियों पर अपना आत्मा उण्डेलूंगा; तुम्हारे बेटे-बेटियां भविष्यद्वाणी करेंगी, और तुम्हारे पुरनिये स्वप्न देखेंगे, और तुम्हारे जवान दर्शन देखेंगे।” (योएल 2:28)।

19.यह भविष्यद्वाणी कब पूरी होने लगी?
16 परन्तु यह वह बात है, जो योएल भविष्यद्वक्ता के द्वारा कही गई है। 17 कि परमेश्वर कहता है, कि अन्त कि दिनों में ऐसा होगा, कि मैं अपना आत्मा सब मनुष्यों पर उंडेलूंगा और तुम्हारे बेटे और तुम्हारी बेटियां भविष्यद्वाणी करेंगी और तुम्हारे जवान दर्शन देखेंगे, और तुम्हारे पुरिनए स्वप्न देखेंगे।”  (प्रेरितों के काम 2:16,17)।

20.मसीह ने अपनी कलीसिया को कौन-से कुछ वरदान दिए?
इसलिये वह कहता है, कि वह ऊंचे पर चढ़ा, और बन्धुवाई को बान्ध ले गया, और मनुष्यों को दान दिए।
(उसके चढ़ने से, और क्या पाया जाता है केवल यह, कि वह पृथ्वी की निचली जगहों में उतरा भी था।
10 और जो उतर गया यह वही है जो सारे आकाश से ऊपर चढ़ भी गया, कि सब कुछ परिपूर्ण करे)।
11 और उस ने कितनों को भविष्यद्वक्ता नियुक्त करके, और कितनों को सुसमाचार सुनाने वाले नियुक्त करके, और कितनों को रखवाले और उपदेशक नियुक्त करके दे दिया” (इफिसियों 4:8-11)।

21.परमेश्वर ने किस माध्यम से इस्राएल को छुड़ाया और बचाया?
“एक भविष्यद्वक्ता के द्वारा यहोवा इस्राएल को मिस्र से निकाल ले आया, और भविष्यद्वक्ता ही के द्वारा उसकी रक्षा हुई।” (होशे 12:13)।

22.जब मूसा ने उसके धीमे बोलने की शिकायत की, तब परमेश्वर ने कहा, कि हारून उसके लिये क्या हो?
“और वह तेरी ओर से लोगों से बातें किया करेगा; वह तेरे लिये मुंह और तू उसके लिये परमेश्वर ठहरेगा।” (निर्गमन 4:16)।

23.बाद में परमेश्वर ने हारून को क्या कहा?
“तब यहोवा ने मूसा से कहा, सुन, मैं तुझे फिरौन के लिये परमेश्वर सा ठहराता हूं; और तेरा भाई हारून तेरा नबी ठहरेगा।” (निर्गमन 7:1)।

24.झूठे भविष्यद्वक्ताओं का पता लगाने के लिए एक परीक्षा क्या है?
“तो पहिचान यह है कि जब कोई नबी यहोवा के नाम से कुछ कहे; तब यदि वह वचन न घटे और पूरा न हो जाए, तो वह वचन यहोवा का कहा हुआ नहीं; परन्तु उस नबी ने वह बात अभिमान करके कही है, तू उस से भय न खाना” (व्यवस्थाविवरण 18:22)।

25.भविष्यवक्ता के दावों की वैधता का निर्धारण करने के लिए और कौन-सी परीक्षा लागू की जानी चाहिए?
“यदि तेरे बीच कोई भविष्यद्वक्ता वा स्वप्न देखने वाला प्रगट हो कर तुझे कोई चिन्ह वा चमत्कार दिखाए,
और जिस चिन्ह वा चमत्कार को प्रमाण ठहराकर वह तुझ से कहे, कि आओ हम पराए देवताओं के अनुयायी हो कर, जिनसे तुम अब तक अनजान रहे, उनकी पूजा करें,
तब तुम उस भविष्यद्वक्ता वा स्वप्न देखने वाले के वचन पर कभी कान न धरना; क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा तुम्हारी परीक्षा लेगा, जिस से यह जान ले, कि ये मुझ से अपने सारे मन और सारे प्राण के साथ प्रेम रखते हैं वा नहीं?
तुम अपने परमेश्वर यहोवा के पीछे चलना, और उसका भय मानना, और उसकी आज्ञाओं पर चलना, और उसका वचन मानना, और उसकी सेवा करना, और उसी से लिपटे रहना” (व्यवस्थाविवरण 13:1-4)।

टिप्पणी:-इन शास्त्रों से यह देखा जाएगा कि, सबसे पहले, यदि किसी नबी की बात सच साबित नहीं होती है, तो यह इस बात का प्रमाण है कि ईश्वर ने उस नबी को नहीं भेजा है। दूसरी ओर, भले ही भविष्यद्वाणी की गई बात पूरी हो जाती है, अगर दिखावा करने वाला भविष्यद्वक्ता दूसरों को परमेश्वर की आज्ञाओं को तोड़ने के लिए नेतृत्व करना चाहता है, तो यह सभी संकेतों की परवाह किए बिना सकारात्मक सबूत होना चाहिए कि वह एक सच्चा भविष्यद्वक्ता नहीं है।

26.सच्चे और झूठे भविष्यद्वक्ताओं के बीच भेद करने के लिए मसीह ने क्या नियम दिया?
“उनके फलों से तुम उन्हें जानोगे।” (मत्ती 7:20)।

27.सभी भविष्यद्वक्ताओं की परीक्षा लेने के लिए कौन-सा सामान्य नियम निर्धारित किया गया है?
“व्यवस्था और चितौनी ही की चर्चा किया करो! यदि वे लोग इस वचनों के अनुसार न बोलें तो निश्चय उनके लिये पौ न फटेगी (यशायाह 8:20)।

28.परमेश्वर के भविष्यद्वक्ताओं ने प्राचीन काल में लोगों को आज्ञा मानने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए पूर्व भविष्यद्वक्ताओं के शब्दों का उपयोग कैसे किया?
“क्या यह वही वचन नहीं है, जो यहोवा अगले भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा उस समय पुकार कर कहता रहा जब यरूशलेम अपने चारों ओर के नगरों समेत चैन से बसा हुआ था, और दक्खिन देश और नीचे का देश भी बसा हुआ था?” (जकर्याह 7:7)।

29.परमेश्वर के भविष्यद्वक्ताओं पर विश्वास करने का वादा किया हुआ परिणाम क्या है?
“बिहान को वे सबेरे उठ कर तकोआ के जंगल की ओर निकल गए; और चलते समय यहोशापात ने खड़े हो कर कहा, हे यहूदियो, हे यरूशलेम के निवासियो, मेरी सुनो, अपने परमेश्वर यहोवा पर विश्वास रखो, तब तुम स्थिर रहोगे; उसके नबियों की प्रतीत करो, तब तुम कृतार्थ हो जाओगे।” (2 इतिहास 20:20)।

30.भविष्यद्वाणी के वरदान के बारे में क्या सलाह दी गयी है?
20 भविष्यद्वाणियों को तुच्छ न जानो। 21 सब बातों को परखो: जो अच्छी है उसे पकड़े रहो।” (1 थिस्सलुनीकियों 5:20,21)।

31.अंतिम, या शेष, कलीसिया की क्या विशेषता होगी?
“और अजगर स्त्री पर क्रोधित हुआ, और उसकी शेष सन्तान से जो परमेश्वर की आज्ञाओं को मानते, और यीशु की गवाही देने पर स्थिर हैं, लड़ने को गया। और वह समुद्र के बालू पर जा खड़ा हुआ॥” (प्रकाशितवाक्य 12:17)।

32.“यीशु की गवाही” क्या है?
“यीशु की गवाही भविष्यद्वाणी की आत्मा है।” (प्रकाशितवाक्य 19:10;  प्रकाशितवाक्य 1:9)।

33.जब यह वरदान अनुपस्थित होता है तो क्या परिणाम होते हैं?
“जहां दर्शन की बात नहीं होती, वहां लोग निरंकुश हो जाते हैं, और जो व्यवस्था को मानता है वह धन्य होता है।” (नीतिवचन 29:18; भजन संहिता 74:9)। 

ध्यान दें: निम्नलिखित पद्यांश अंग्रेजी भाषा का एक भजन है।

क्या दरिद्र, तुच्छ कंपनी
यात्रियों में से ये हैं,
जो संकरे रास्ते पर चलते हैं,
बीहड़ भूलभुलैया के साथ?

आह! ये शाही वंश के हैं,
एक राजा के सभी बच्चे,
अमर ताज के वारिस ईश्वरीय;
और लो! वे खुशी के लिए गाते हैं।

फिर वे इतने मतलबी क्यों दिखते हैं,
और इतना तिरस्कार क्यों?
उनके समृद्ध वस्त्रों के कारण अनदेखी
दुनिया को समझा नहीं जाता।

लेकिन वे उस सँकरे मार्ग को क्यों रखते हैं,-
वह ऊबड़-खाबड़, कंटीली भूलभुलैया?
क्यों, इस तरह से उनके अगुए तड़पते हैं,
वे प्रेम करते हैं और उसके मार्ग पर चलते हैं।

वे क्यों मनभावन मार्ग को त्याग देते हैं
वह दुनियावाले इतना प्यार करते हैं?
क्योंकि यही मौत का रास्ता है,
नरक का खुला रास्ता।

क्या! क्या कोई और रास्ता नहीं है
सलेम की खुशहाली के लिए?
परमेश्वर के लिए मसीह ही एकमात्र रास्ता है,
कोई अन्य नहीं मिल सकता है।

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