(22) परमेश्वर से मेल मिलाप

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1.परमेश्वर ने अपने नियुक्त संदेशवाहकों के द्वारा हमें क्या याचना का सन्देश भेजा है?
“सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो।” (2 कुरिन्थियों 5:20)।

2.यह सुलह किसके द्वारा की जाती है?
“और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिस ने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल-मिलाप कर लिया, और मेल-मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है।”  (2 कुरिन्थियों 5:18)।

3.इस मेल-मिलाप को प्रभावित करने के लिए क्या आवश्यक था?
“क्योंकि बैरी होने की दशा में तो उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर के साथ हुआ फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्यों न पाएंगे?” (रोमियों 5:10)।

4.मेल-मिलाप का कौन-सा आधार मसीह की मृत्यु के द्वारा बनाया गया था?
“और उसके क्रूस पर बहे हुए लोहू के द्वारा मेल मिलाप करके, सब वस्तुओं का उसी के द्वारा से अपने साथ मेल कर ले चाहे वे पृथ्वी पर की हों, चाहे स्वर्ग में की।” (कुलुस्सियों 1:20)।

5.सुलह किसके द्वारा प्राप्त होती है?
“और केवल यही नहीं, परन्तु हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जिस के द्वारा हमारा मेल हुआ है, परमेश्वर के विषय में घमण्ड भी करते हैं॥” (रोमियों 5:11)।

6.क्रूस के द्वारा मसीह किस एकता के द्वारा यहूदी और अन्यजातियों का परमेश्वर से मेल मिलाप करता है?
“और क्रूस पर बैर को नाश करके इस के द्वारा दानों को एक देह बनाकर परमेश्वर से मिलाए।” (इफिसियों 2:16)।

7.मेल-मिलाप के कार्य की भविष्यद्वाणी किस भविष्यद्वाणी में की गई थी?
“तेरे लोगों और तेरे पवित्र नगर के लिये सत्तर सप्ताह ठहराए गए हैं कि उनके अन्त तक अपराध का होना बन्द हो, और पापों को अन्त और अधर्म का प्रायश्चित्त किया जाए, और युगयुग की धामिर्कता प्रगट होए; और दर्शन की बात पर और भविष्यवाणी पर छाप दी जाए, और परमपवित्र का अभिषेक किया जाए।” (दानिय्येल 9:24)।

8.इस प्रकार संसार का अपने साथ मेल मिलाप करने में, परमेश्वर ने मनुष्यों के प्रति क्या रवैया अपनाया?
“अर्थात परमेश्वर ने मसीह में होकर अपने साथ संसार का मेल मिलाप कर लिया, और उन के अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया और उस ने मेल मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है॥” (2 कुरिन्थियों 5:19)।

9.किस कारण से परमेश्वर के लिए पापियों के साथ ऐसा व्यवहार करना संभव हुआ?
“हम तो सब के सब भेड़ों की नाईं भटक गए थे; हम में से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया; और यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया॥” (यशायाह 53:6)।

10.मनुष्यों को पाप से छुड़ाने के लिए मसीह को क्या बनाया गया था?
“जो पाप से अज्ञात था, उसी को उस ने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में होकर परमेश्वर की धामिर्कता बन जाएं॥” (2 कुरिन्थियों 5:21)।

11.उसके साथ कैसा व्यवहार किया गया?
“परन्तु वह हमारे ही अपराधो के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं।” (यशायाह 53:5)।

12.यूहन्ना ने उसके विषय में क्या घोषणा की?
“दूसरे दिन उस ने यीशु को अपनी ओर आते देखकर कहा, देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है, जो जगत के पाप उठा ले जाता है।” (यूहन्ना 1:29)।

13.मसीह इन पापों को किस स्थान पर ले गया?
“वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिए हुए क्रूस पर चढ़ गया जिस से हम पापों के लिये मर कर के धामिर्कता के लिये जीवन बिताएं: उसी के मार खाने से तुम चंगे हुए।” (1 पतरस 2:24)।

14.सुलह के अपने कार्य में मसीह का महान उद्देश्य क्या है?
21 और उस ने अब उसकी शारीरिक देह में मृत्यु के द्वारा तुम्हारा भी मेल कर लिया जो पहिले निकाले हुए थे और बुरे कामों के कारण मन से बैरी थे। 22 ताकि तुम्हें अपने सम्मुख पवित्र और निष्कलंक, और निर्दोष बनाकर उपस्थित करे।” (कुलुस्सियों 1:21,22)।

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