(130) मसीही शिष्टाचार

मसीही शिष्टाचार

1. एक दूसरे के प्रति हमारा चालचलन कैसा होना चाहिए?
“निदान, सब के सब एक मन और कृपामय और भाईचारे की प्रीति रखने वाले, और करूणामय, और नम्र बनो।” (1 पतरस 3:8)।

2. हमें कितनों का आदर करना चाहिए?
“सब का आदर करो, भाइयों से प्रेम रखो, परमेश्वर से डरो, राजा का सम्मान करो।” (1 पतरस 2:17)।

3. हमें किसे प्रणाम करना चाहिए?
“और यदि तुम केवल अपने भाइयों ही को नमस्कार करो, तो कौन सा बड़ा काम करते हो? क्या अन्यजाति भी ऐसा नहीं करते?” (मत्ती 5:47)।

4. बुज़ुर्गों का कैसा आदर करना चाहिए?
“पक्के बाल वाले के साम्हने उठ खड़े होना, और बूढ़े का आदरमान करना, और अपने परमेश्वर का भय निरन्तर मानना; मैं यहोवा हूं।” (लैव्यव्यवस्था 19:32; 2 राजा 2:23,24 देखें)।

5. बच्चों को खासकर किसका आदर करना चाहिए?
“तू अपने पिता और अपनी माता का आदर करना, जिस से जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देता है उस में तू बहुत दिन तक रहने पाए॥” (निर्गमन 20:12)।

6. विश्वासयोग्य सुसमाचार सेवकों को किस प्रकार आदर देना चाहिए?
“जो प्राचीन अच्छा प्रबन्ध करते हैं, विशेष करके वे जो वचन सुनाने और सिखाने में परिश्रम करते हैं, दो गुने आदर के योग्य समझे जाएं।” (1 तीमुथियुस 5:17)।

7. सच्चे मसीही शिष्टाचार का आधार क्या है?
प्रेम धीरजवन्त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं।
वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता।” (1 कुरीं 13:4,5)।

टिप्पणी:-सच्चा मसीही शिष्टाचार प्यार का परिणाम है, और दूसरों के लिए विचारशील विचार में खुद को प्रकट करता है।

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