(13) मसीह से संबंधित भविष्यद्वाणियां

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मसीह से संबंधित भविष्यद्वाणियां

1.मूसा ने किसको कहा था कि यहोवा उठाएगा?
“तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे मध्य से, अर्थात तेरे भाइयों में से मेरे समान एक नबी को उत्पन्न करेगा; तू उसी की सुनना;” (व्यवस्थाविवरण 18:15; पद 18 भी देखें)।

2.प्रेरित पतरस द्वारा इस भविष्यद्वाणी का क्या उपयोग दर्शाता है कि यह मसीह को संदर्भित करता है?
22 जैसा कि मूसा ने कहा, प्रभु परमेश्वर तुम्हारे भाइयों में से तुम्हारे लिये मुझ सा एक भविष्यद्वक्ता उठाएगा, जो कुछ वह तुम से कहे, उस की सुनना। 23 परन्तु प्रत्येक मनुष्य जो उस भविष्यद्वक्ता की न सुने, लोगों में से नाश किया जाएगा। 24 और शमूएल से लेकर उसके बाद वालों तक जितने भविष्यद्वक्ताओं ने बातें की हैं उन सब ने इन दिनों का सन्देश दिया है।” (प्रेरितों के काम 3:22-24)।

3.यशायाह ने किस भाषा में मसीह के जन्म की भविष्यद्वाणी की थी?
“इस कारण प्रभु आप ही तुम को एक चिन्ह देगा। सुनो, एक कुमारी गर्भवती होगी और पुत्र जनेगी, और उसका नाम इम्मानूएल रखेगी।” (यशायाह 7:14)।

4.यह भविष्यद्वाणी किस घटना में पूरी हुई?
22 यह सब कुछ इसलिये हुआ कि जो वचन प्रभु ने भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा था; वह पूरा हो। 23 कि, देखो एक कुंवारी गर्भवती होगी और एक पुत्र जनेगी और उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा जिस का अर्थ यह है “ परमेश्वर हमारे साथ”।” (मत्ती 1:22,23)।

5.मसीहा का जन्म कहाँ होना था?
“हे बेतलेहेम एप्राता, यदि तू ऐसा छोटा है कि यहूदा के हजारों में गिना नहीं जाता, तौभी तुझ में से मेरे लिये एक पुरूष निकलेगा, जो इस्राएलियों में प्रभुता करने वाला होगा; और उसका निकलना प्राचीन काल से, वरन अनादि काल से होता आया है।” (मीका 5:2)।

6.यीशु का जन्म कब हुआ था?
“रोदेस राजा के दिनों में जब यहूदिया के बैतलहम में यीशु का जन्म हुआ, तो देखो, पूर्व से कई ज्योतिषी यरूशलेम में आकर पूछने लगे।” (मत्ती 2:1)।

7.बिलाम ने किस चिन्ह के अधीन भविष्यद्वाणी की थी?
“मैं उसको देखूंगा तो सही, परन्तु अभी नहीं; मैं उसको निहारूंगा तो सही, परन्तु समीप होके नहीं: याकूब में से एक तारा उदय होगा, और इस्त्राएल में से एक राज दण्ड उठेगा; जो मोआब की अलंगों को चूर कर देगा, जो सब दंगा करने वालों को गिरा देगा।” (गिनती 24:17)।

8.किस धर्मग्रन्थ में मसीह ने वही प्रतीक अपने ऊपर लागू किया है?
“मुझ यीशु ने अपने स्वर्गदूत को इसलिये भेजा, कि तुम्हारे आगे कलीसियाओं के विषय में इन बातों की गवाही दे: मैं दाऊद का मूल, और वंश, और भोर का चमकता हुआ तारा हूं॥” (प्रकाशितवाक्य 22:16; और 2 पतरस 1:19; प्रकाशितवाक्य 2:28 भी देखें)।

9.बेतलेहेम के बच्चों के वध में कौन-सी भविष्यद्वाणी पूरी हुई?
13 उन के चले जाने के बाद देखो, प्रभु के एक दूत ने स्वप्न में यूसुफ को दिखाई देकर कहा, उठ; उस बालक को और उस की माता को लेकर मिस्र देश को भाग जा; और जब तक मैं तुझ से न कहूं, तब तक वहीं रहना; क्योंकि हेरोदेस इस बालक को ढूंढ़ने पर है कि उसे मरवा डाले। 14 वह रात ही को उठकर बालक और उस की माता को लेकर मिस्र को चल दिया। 15 और हेरोदेस के मरने तक वहीं रहा; इसलिये कि वह वचन जो प्रभु ने भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा था कि मैं ने अपने पुत्र को मिस्र से बुलाया पूरा हो। 16 जब हेरोदेस ने यह देखा, कि ज्योतिषियों ने मेरे साथ ठट्ठा किया है, तब वह क्रोध से भर गया; और लोगों को भेजकर ज्योतिषियों से ठीक ठीक पूछे हुए समय के अनुसार बैतलहम और उसके आस पास के सब लड़कों को जो दो वर्ष के, वा उस से छोटे थे, मरवा डाला। 17 तब जो वचन यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा गया था, वह पूरा हुआ, 18 कि रामाह में एक करूण-नाद सुनाई दिया, रोना और बड़ा विलाप, राहेल अपने बालकों के लिये रो रही थी, और शान्त होना न चाहती थी, क्योंकि वे हैं नहीं॥” (मत्ती 2:13-18)।

10.मसीह के पहले आगमन की घोषणा कैसे हुई?
“किसी की पुकार सुनाई देती है, जंगल में यहोवा का मार्ग सुधारो, हमारे परमेश्वर के लिये अराबा में एक राजमार्ग चौरस करो।” (यशायाह 40:3)।

11.यह किसके द्वारा पूरा किया गया?
19 यूहन्ना की गवाही यह है, कि जब यहूदियों ने यरूशलेम से याजकों और लेवीयों को उस से यह पूछने के लिये भेजा, कि तू कौन है? 20 तो उस ने यह मान लिया, और इन्कार नहीं किया परन्तु मान लिया कि मैं मसीह नहीं हूं। 21 तब उन्होंने उस से पूछा, तो फिर कौन है? क्या तू एलिय्याह है? उस ने कहा, मैं नहीं हूं: तो क्या तू वह भविष्यद्वक्ता है? उस ने उत्तर दिया, कि नहीं। 22 तब उन्होंने उस से पूछा, फिर तू है कौन? ताकि हम अपने भेजने वालों को उत्तर दें; तू अपने विषय में क्या कहता है? 23 उस ने कहा, मैं जैसा यशायाह भविष्यद्वक्ता ने कहा है, जंगल में एक पुकारने वाले का शब्द हूं कि तुम प्रभु का मार्ग सीधा करो” (यूहन्ना 1:19-23)।

12.मसीह को उसके अपने लोगों द्वारा कैसे ग्रहण किया जाना था?
“वह तुच्छ जाना जाता और मनुष्यों का त्यागा हुआ था; वह दु:खी पुरूष था, रोग से उसकी जान पहिचान थी; और लोग उस से मुख फेर लेते थे। वह तुच्छ जाना गया, और, हम ने उसका मूल्य न जाना॥” (यशायाह 53:3)।

13.इस भविष्यद्वाणी की पूर्ति कैसे दर्ज की गई है?
10 वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना। 11 वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया।” (यूहन्ना 1:10,11)।

14.मसीह के प्रचार के बारे में क्या भविष्यद्वाणी की गई थी?
“प्रभु यहोवा का आत्मा मुझ पर है; क्योंकि यहोवा ने सुसमाचार सुनाने के लिये मेरा अभिषेक किया और मुझे इसलिये भेजा है कि खेदित मन के लोगों को शान्ति दूं; कि बंधुओं के लिये स्वतंत्रता का और कैदियों के लिये छुटकारे का प्रचार करूं।” (यशायाह 61:1)।

15.यीशु ने इस भविष्यद्वाणी पर क्या लागू किया?
16 और वह नासरत में आया; जहां पाला पोसा गया था; और अपनी रीति के अनुसार सब्त के दिन आराधनालय में जा कर पढ़ने के लिये खड़ा हुआ। 17 यशायाह भविष्यद्वक्ता की पुस्तक उसे दी गई, और उस ने पुस्तक खोलकर, वह जगह निकाली जहां यह लिखा था। 18 कि प्रभु का आत्मा मुझ पर है, इसलिये कि उस ने कंगालों को सुसमाचार सुनाने के लिये मेरा अभिषेक किया है, और मुझे इसलिये भेजा है, कि बन्धुओं को छुटकारे का और अन्धों को दृष्टि पाने का सुसमाचार प्रचार करूं और कुचले हुओं को छुड़ाऊं। 19 और प्रभु के प्रसन्न रहने के वर्ष का प्रचार करूं। 20 तब उस ने पुस्तक बन्द करके सेवक के हाथ में दे दी, और बैठ गया: और आराधनालय के सब लोगों की आंख उस पर लगी थीं। 21 तब वह उन से कहने लगा, कि आज ही यह लेख तुम्हारे साम्हने पूरा हुआ है।” (लूका 4:16-21; लूका 7:19-22 देखें)।

16.भविष्यद्वाणी के अनुसार, परीक्षण के समय मसीह को स्वयं का आचरण कैसे करना था?
“वह सताया गया, तौभी वह सहता रहा और अपना मुंह न खोला; जिस प्रकार भेड़ वध होने के समय वा भेड़ी ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उसने भी अपना मुंह न खोला।” (यशायाह 53:7)।

17.जब पीलातुस के सामने उसके शत्रुओं द्वारा आरोप लगाया गया, तो मसीह ने इन आरोपों के साथ कैसा व्यवहार किया?
13 इस पर पीलातुस ने उस से कहा: क्या तू नहीं सुनता, कि ये तेरे विरोध में कितनी गवाहियां दे रहे हैं? 14 परन्तु उस ने उस को एक बात का भी उत्तर नहीं दिया, यहां तक कि हाकिम को बड़ा आश्चर्य हुआ।” (मत्ती 27:13;14)।

18.क्रूस पर चढ़ाए जाने के समय मसीह के वस्त्रों के निपटान के बारे में किस भविष्यद्वाणी में पहले ही बताया गया था?
“वे मेरे वस्त्र आपस में बांटते हैं, और मेरे पहिरावे पर चिट्ठी डालते हैं।” (भजन संहिता 22:18)।

19.कौन-सा अभिलेख इस भविष्यद्वाणी का उत्तर देता है?
“तब उन्होंने उसे क्रूस पर चढ़ाया; और चिट्ठियां डालकर उसके कपड़े बांट लिए।” (मत्ती 27:35)।

20.क्रूस पर रहते हुए उसके उपचार के बारे में क्या भविष्यद्वाणी की गई थी?
“और लोगों ने मेरे खाने के लिये इन्द्रायन दिया, और मेरी प्यास बुझाने के लिये मुझे सिरका पिलाया॥” (भजन संहिता 69:21)।

21.क्रूस पर चढ़ाए जाने पर मसीह को क्या दिया गया था?
“उन्होंने पित्त मिलाया हुआ दाखरस उसे पीने को दिया, परन्तु उस ने चखकर पीना न चाहा” (मत्ती 27:34; यूहन्ना 19:28-30 भी देखें)।

22.भविष्यवक्ता यशायाह ने किसके साथ कहा था कि मसीह अपनी कब्र बनाएगा?
“और उसकी कब्र भी दुष्टों के संग ठहराई गई, और मृत्यु के समय वह धनवान का संगी हुआ, यद्यपि उसने किसी प्रकार का अपद्रव न किया था और उसके मुंह से कभी छल की बात नहीं निकली थी॥” (यशायाह 53:9)।

23.मसीह को किसके साथ सूली पर चढ़ाया गया था?
“तब उसके साथ दो डाकू एक दाहिने और एक बाएं क्रूसों पर चढ़ाए गए।” (मत्ती 27:38)।

24.क्रूस पर से उतारे जाने के बाद मसीह के शरीर को किसने संभाला?
57 जब सांझ हुई तो यूसुफ नाम अरिमतियाह का एक धनी मनुष्य जो आप ही यीशु का चेला था आया: उस ने पीलातुस के पास जाकर यीशु की लोथ मांगी। 58 इस पर पीलातुस ने दे देने की आज्ञा दी। 59 यूसुफ ने लोथ को लेकर उसे उज्ज़वल चादर में लपेटा। 60 और उसे अपनी नई कब्र में रखा, जो उस ने चट्टान में खुदवाई थी, और कब्र के द्वार पर बड़ा पत्थर लुढ़काकर चला गया।” (मत्ती 27:57-60)।

25.एक विख्यात भविष्यद्वक्ता के जीवन के किस अनुभव ने मसीह के कब्र में रहने की अवधि का संकेत दिया?
39 उस ने उन्हें उत्तर दिया, कि इस युग के बुरे और व्यभिचारी लोग चिन्ह ढूंढ़ते हैं; परन्तु यूनुस भविष्यद्वक्ता के चिन्ह को छोड़ कोई और चिन्ह उन को न दिया जाएगा। 40 यूनुस तीन रात दिन जल-जन्तु के पेट में रहा, वैसे ही मनुष्य का पुत्र तीन रात दिन पृथ्वी के भीतर रहेगा।” (मत्ती 12:39,40)।

26.किस भविष्यद्वाणी ने मृत्यु पर मसीह की विजय के बारे में पहले ही बताया था?
“क्योंकि तू मेरे प्राण को अधोलोक में न छोड़ेगा, न अपने पवित्र भक्त को सड़ने देगा॥” (भजन संहिता 16:10; और प्रेरितों के काम 2:24-27 देखें)।

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