पौलूस द्वारा कुरिंथियन कलिसिया को दी गई कुछ सलाह क्या हैं?

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कोरिंथियन कलिसिया नैतिक और सिद्धांतवादी मुद्दों से जूझ रही थी। यहां पौलूस की उनके लिए सलाह हैं:

1-एकता का अभाव

पौलूस ने निर्देश दिया, “हे भाइयो, मैं तुम से यीशु मसीह जो हमारा प्रभु है उसके नाम के द्वारा बिनती करता हूं, कि तुम सब एक ही बात कहो; और तुम में फूट न हो, परन्तु एक ही मन और एक ही मत होकर मिले रहो” (1 कुरिन्थियों 1:10)। विश्वासी की निष्ठा मसीह के प्रति है न कि मानव नेताओं के प्रति।

2-अनैतिकता

पौलूस ने निर्देश दिया, “यहां तक सुनने में आता है, कि तुम में व्यभिचार होता है, वरन ऐसा व्यभिचार जो अन्यजातियों में भी नहीं होता, कि एक मनुष्य अपने पिता की पत्नी को रखता है। शरीर के विनाश के लिये शैतान को सौंपा जाए, ताकि उस की आत्मा प्रभु यीशु के दिन में उद्धार पाए” (1 कुरिन्थियों 5:1,5)।

3-व्यवस्था का मुकदमा

पौलूस ने निर्देश दिया, “क्यातुम में से किसी को यह हियाव है, कि जब दूसरे के साथ झगड़ा हो, तो फैसले के लिये अधिमिर्यों के पास जाए; और पवित्र लागों के पास न जाए? क्या तुम नहीं जानते, कि पवित्र लोग जगत का न्याय करेंगे? सो जब तुम्हें जगत का न्याय करना हे, तो क्या तुम छोटे से छोटे झगड़ों का भी निर्णय करने के योग्य नहीं? क्या तुम नहीं जानते, कि हम स्वर्गदूतों का न्याय करेंगे? तो क्या सांसारिक बातों का निर्णय न करें? सो यदि तुम्हें सांसारिक बातों का निर्णय करना हो, तो क्या उन्हीं को बैठाओगे जो कलीसिया में कुछ नहीं समझे जाते हैं” (1 कुरिन्थियों 6: 1-4)।

4-विवाह

पौलूस ने निर्देश दिया, “पति अपनी पत्नी का हक पूरा करे; और वैसे ही पत्नी भी अपने पति का। तुम एक दूसरे से अलग न रहो; परन्तु केवल कुछ समय तक आपस की सम्मति से कि प्रार्थना के लिये अवकाश मिले, और फिर एक साथ रहो, ऐसा न हो, कि तुम्हारे असंयम के कारण शैतान तुम्हें परखे” (1 कुरिन्थियों 7: 3,5)।

5-तलाक

पौलूस ने निर्देश दिया, “जिन का ब्याह हो गया है, उन को मैं नहीं, वरन प्रभु आज्ञा देता है, कि पत्नी अपने पति से अलग न हो। (और यदि अलग भी हो जाए, तो बिन दूसरा ब्याह किए रहे; या अपने पति से फिर मेल कर ले) और न पति अपनी पत्नी को छोड़े। दूसरें से प्रभु नहीं, परन्तु मैं ही कहता हूं, यदि किसी भाई की पत्नी विश्वास न रखती हो, और उसके साथ रहने से प्रसन्न हो, तो वह उसे न छोड़े। और जिस स्त्री का पति विश्वास न रखता हो, और उसके साथ रहने से प्रसन्न हो; वह पति को न छोड़े।”(1 कुरिन्थियों 7: 10-11,12-13)।

6-खतना

पौलूस ने निर्देश दिया, “पर जैसा प्रभु ने हर एक को बांटा है, और परमेश्वर ने हर एक को बुलाया है; वैसा ही वह चले: और मैं सब कलीसियाओं में ऐसा ही ठहराता हूं। जो खतना किया हुआ बुलाया गया हो, वह खतनारिहत न बने: जो खतनारिहत बुलाया गया हो, वह खतना न कराए” (1 कुरिन्थियों 7: 17,18)।

7- मूर्तियों को भेंट किया गया भोजन

पौलूस ने निर्देश दिया, “सो मूरतों के साम्हने बलि की हुई वस्तुओं के खाने के विषय में हम जानते हैं, कि मूरत जगत में कोई वस्तु नहीं, और एक को छोड़ और कोई परमेश्वर नहीं। परन्तु चौकस रहो, ऐसा न हो, कि तुम्हारी यह स्वतंत्रता कहीं निर्बलों के लिये ठोकर का कारण हो जाए। इस कारण यदि भोजन मेरे भाई को ठोकर खिलाए, तो मैं कभी किसी रीति से मांस न खाऊंगा, न हो कि मैं अपने भाई के ठोकर का कारण बनूं” (1 कुरिन्थियों 8: 4,9,13)।

8-स्त्रियों का सिर ढकना

पौलूस ने निर्देश दिया, “तुम आप ही विचार करो, क्या स्त्री को उघाड़े सिर परमेश्वर से प्रार्थना करना सोहता है? क्या स्वाभाविक रीति से भी तुम नहीं जानते, कि यदि पुरूष लम्बे बाल रखे, तो उसके लिये अपमान है। परन्तु यदि स्त्री लम्बे बाल रखे; तो उसके लिये शोभा है क्योंकि बाल उस को ओढ़नी के लिये दिए गए हैं।” (1 कुरिन्थियों 11: 13-15)।

9-प्रभु भोज

पौलूस ने निर्देश दिया, “सो तुम जो एक जगह में इकट्ठे होते हो तो यह प्रभु भोज खाने के लिये नहीं। क्योंकि खाने के समय एक दूसरे से पहिले अपना भोज खा लेता है, सो कोई तो भूखा रहता है, और कोई मतवाला हो जाता है। क्या खाने पीने के लिये तुम्हारे घर नहीं या परमेश्वर की कलीसिया को तुच्छ जानते हो, और जिन के पास नहीं है उन्हें लज्ज़ित करते हो मैं तुम से क्या कहूं? क्या इस बात में तुम्हारी प्रशंसा करूं? मैं प्रशंसा नहीं करता” (1 कुरिन्थियों 11: 20-22)।

10-अभिमान और ईर्ष्या

पौलूस ने निर्देश दिया, ” परन्तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्छा के अनुसार एक एक कर के देह में रखा है। यदि वे सब एक ही अंग होते, तो देह कहां होती? परन्तु अब अंग तो बहुत से हैं, परन्तु देह एक ही है। आंख हाथ से नहीं कह सकती, कि मुझे तेरा प्रयोजन नहीं, और न सिर पांवों से कह सकता है, कि मुझे तुम्हारा प्रयोजन नहीं” (1 कुरिन्थियों 12: 18- 21)।

11-अन्य भाषाओँ में बात करना

पौलूस ने निर्देश दिया, “ऐसे ही तुम भी यदि जीभ से साफ साफ बातें न कहो, तो जो कुछ कहा जाता है वह क्योंकर समझा जाएगा? तुम तो हवा से बातें करने वाले ठहरोगे। परन्तु कलीसिया में अन्य भाषा में दस हजार बातें कहने से यह मुझे और भी अच्छा जान पड़ता है, कि औरों के सिखाने के लिये बुद्धि से पांच ही बातें कहूं” (1 कुरिन्थियों 14: 9,19)।

12-पुनरुत्थान का नकारना

पौलूस ने निर्देश दिया, “सो जब कि मसीह का यह प्रचार किया जाता है, कि वह मरे हुओं में से जी उठा, तो तुम में से कितने क्योंकर कहते हैं, कि मरे हुओं का पुनरुत्थान है ही नहीं? यदि मरे हुओं का पुनरुत्थान ही नहीं, तो मसीह भी नहीं जी उठा। और यदि मसीह भी नहीं जी उठा, तो हमारा प्रचार करना भी व्यर्थ है; और तुम्हारा विश्वास भी व्यर्थ है” (1 कुरिन्थियों 15: 12-14)।

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परमेश्वर की सेवा में,
BibleAsk टीम

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