पाप की जड़ क्या है? क्या यह मानव इच्छा है?

Total
2
Shares

This answer is also available in: English العربية Français

अभिमान और स्वार्थ सभी पापों की जड़ है। शुरुआत में, स्वर्ग की सबसे ऊँचे पद के स्वर्गदूत लूसीफर ने परमेश्वर को सत्ता से हटाने का निर्णय किया “क्योंकि तू मन में कहता तो था, … मैं अपने सिंहासन को ईश्वर के तारागण से अधिक ऊंचा करूंगा; … मैं परमप्रधान के तुल्य हो जाऊंगा” (यशायाह 14:13,14)। इन बुरे पापों के कारण उसका पतन हुआ।

(यह भी देखें, “सात घातक पाप क्या हैं?”

उत्पति

परमेश्वर ने मनुष्यों को सिद्ध और अपने स्वरुप में स्वतंत्र चुनाव की क्षमता के साथ रचा (उत्पत्ति 1:26,27)। दुखपूर्वक, हमारे माता-पिता (आदम और हव्वा) ने ईश्वर की आज्ञा उल्लंघन करना चुना। इस प्रकार, उन्होंने गर्व और स्वार्थ के पापों को अपने दिलों में जड़ लेने की अनुमति दी (उत्पत्ति 3:6)।

परमेश्वर ने उन्हें ख़तरे से आगाह करने की पूरी कोशिश की (उत्पत्ति 2;16), लेकिन वह उन्हें रोककर हस्तक्षेप नहीं कर सकता था या अन्यथा जिस तरह से उसने उन्हें एक स्वतंत्र इच्छा के साथ बनाया था, उनके खिलाफ जाता। यदि परमेश्वर ने आदम और हव्वा को रोक होता, तो मनुष्य केवल यंत्रमानव (रोबोट) होते।

स्वतंत्र इच्छा

परमेश्वर बिना किसी पसंद के यंत्रमानव (रोबोट) या जीव नहीं बनाना चाहता (यहोशू 24:15)। ईश्वर जो प्रेम है (1 यूहन्ना 4:8) समझ गया कि इच्छा की पूरी स्वतंत्रता वाले प्राणी ही उसके साथ प्रेमपूर्ण संबंध रख सकते हैं क्योंकि प्रेम में कोई जबरदस्ती नहीं है।

केवल प्रेम अपने प्राणियों को स्वतंत्र इच्छा देता और उस दुख को प्राप्त करने के जोखिम से होकर गुजरता जो पाप ईश्वरत्व के लिए लाया था। केवल प्रेम को उन लोगों के लिए हंसमुख स्वैच्छिक सेवा प्राप्त करने में रुचि होती जो अपने मार्ग में जाने के लिए स्वतंत्र थे। और जब पाप आया, तो केवल प्यार में एक योजना तैयार करने लिए धैर्य और इच्छाशक्ति हो सकती थी, जिससे ब्रह्मांड अच्छे और बुरे के बीच के विवादों में बुनियादी तथ्यों को पूरी तरह समझ सके, और आगे गर्व और स्वार्थ इस तरह किसी भी विद्रोह के खिलाफ सुनिश्चित हो सके ।

ईश्वर का प्रेम

केवल प्रेम ही उस योजना को प्रेरित कर सकता था जो मसीह को उसके सांसारिक जीवन, मृत्यु और पुनरुत्थान द्वारा पाप के दोष और शक्ति से मानव जाति को छुड़ाने की अनुमति देता। अपने स्वभाव से परमेश्वर को इस अद्भुत योजना को तैयार करने और आगे बढ़ाने के लिए धकेला (यूहन्ना 3:16)। परमेश्वर ने हमारे छुटकारे की भारी कीमत चुकाई। “इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे” (यूहन्ना15:13)।

परमेश्वर की सेवा में,
BibleAsk टीम

This answer is also available in: English العربية Français

Subscribe to our Weekly Updates:

Get our latest answers straight to your inbox when you subscribe here.

You May Also Like

मानवता का यहाँ पृथ्वी पर उद्देश्य क्या है?

This answer is also available in: English العربية Françaisमानवता का उद्देश्य, जैसा कि ईश्वर ने बनाया है, मेलजोल के लिए है: “मैं तुझ से सदा प्रेम रखता आया हूँ; इस…

बाइबल के अनुसार मनुष्य का स्वभाव क्या है?

This answer is also available in: English العربية Françaisबाइबल के अनुसार मनुष्य का स्वभाव क्या है? ध्यान दें: अंग्रेजी में 2 शब्द हैं जिनके लिए हिन्दी मे एक ही शब्द…