परमेश्वर ने हमें चार सुसमाचार क्यों दिए?

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चार सुसमाचार यीशु के जीवन की जीवनी नहीं हैं। क्योंकि और भी बहुत सारे चमत्कार हैं जो यीशु ने किये और जो वचन बोले थे, वे सुसमाचार लेख में शामिल नहीं थे (यूहन्ना 21:25)। मती, मरकुस और लुका के सुसमाचारों को उनके समान शैलियों के कारण “सिनॉप्टिक गोस्पेल्स”(समान नज़रिये वाले सुसमाचार) के रूप में नामित किया गया है और क्योंकि वे यीशु के जीवन का एक सारांश प्रस्तुत करते हैं

जबकि पूरी बाइबल परमेश्वर से प्रेरित है(2 तीमुथियुस 3:16) , प्रभु ने अपने लेखन के माध्यम से अपने सत्य को प्रकट करने के लिए अलग-अलग भूमिका वाले सुसमाचार लेखकों का उपयोग किया। प्रत्येक सुसमाचार एक विशिष्ट कारण के लिए लिखा गया है। क्योंकि लेखकों ने यीशु के जीवन को विभिन्न कोणों से देखा। लेकिन सभी मिलकर मसीहा और उनके मिशन की पूरी तस्वीर पेश करते हैं।

सुसमाचार यीशु के जीवन के चार पहलुओं को शामिल करते हैं:

मती ने यीशु को वादा किए गए राजा के रूप में दाऊद के पुत्र के रूप में पेश किया जो हमेशा के लिए शासन करेगा (यशायाह 11:1; मत्ती 1:12: 9:27; 21:9)। वह यीशु की वंशावली से दिखाता है कि वह वादा किया गया मसीहा था।

मरकुस यीशु को मनुष्य के पुत्र के रूप में प्रस्तुत करता है (जकर्याह 3:8; मरकुस 8:36)। वह, बरनबास का एक चचेरा भाई (कुलुस्सियों 4:10), मुख्य रूप से रोमन या अन्यजातियों के मसीहियों के लिए लिखते हैं। उनके लेख में पुराने नियम की भविष्यद्वाणियां शामिल हैं और कई यहूदी शब्दों और रीति-रिवाजों का वर्णन किया गया है। लेखक मसीह की वंशावली शामिल नहीं करता है। मरकुस मसीह को पीड़ित सेवक के रूप में बल देता है, वह जो सेवा के लिए नहीं, लेकिन सेवा करने और अपने जीवन को कई लोगों के लिए फिरौती देने के लिए आया था (मरकुस 10:45)।

लुका यीशु को मनुष्य के बेटे के रूप में दिखाता है (जकर्याह 6:12; लूका 3:38)। वह यीशु की मानवता पर बल देता है। एक “चिकित्सक” (कुलुस्सियों 4:14), सुसमाचार प्रचारक और इतिहासकार के रूप में, वह चश्मदीद गवाहों की सूचना के आधार पर अन्यजातियों तक पहुंचता है (लुका 1:1-4) और यहूदी रीति-रिवाजों और यूनानी नामों को साझा करता है।

यूहन्ना यीशु को परमेश्वर के पुत्र के रूप में प्रस्तुत करता है (यशायाह 4:2; 7:14; यूहन्ना 1:1,13; 3:16)। एक चश्मदीद गवाह के रूप में, वह विश्वास और उद्धार के अर्थ पर बल देता है। और वह मसीह के ईश्वरीयता की भी पुष्टि करता है (यूहन्ना 8:58; निर्गमन 3: 13-14; यूहन्ना 20: 30-31) और यीशु के अंतिम दिनों में हुई घटनाओं की विस्तृत तस्वीर देता है।

परमेश्वर के सत्य को सत्यापित करने के लिए चार गवाह

व्यवस्थाविवरण 19:15 के अनुसार, किसी भी अदालत में निर्णय एक प्रत्यक्ष दर्शी की गवाही पर नहीं, बल्कि न्यूनतम रूप में दो या तीन गवाहों की गवाही पर किया गया था। इसी तरह, मसीह के जीवन पर सुसमाचार का लेख कई वर्णनों पर आधारित होना चाहिए।

बाइबल के आलोचक अपनी कहानियों में भिन्नता का हवाला देकर सुसमाचारों को अपमानित करने की कोशिश करते हैं। वे उस क्रम में अंतर दिखाते हैं जिसमें घटनाओं को प्रस्तुत किया गया था या घटनाओं में मामूली बारीकियों को प्रस्तुत किया गया था। लेकिन अगर हम चार सुसमाचारों के वर्णनों की जांच करते हैं, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि उनके पास समान कालक्रम नहीं है। सुसमाचार में कहानियों को एक सामयिक क्रम में आयोजित किया जाता है, जहां एक घटना एक समान कहानी पेश करती है।

और यहां तक ​​कि चार सुसमाचार के बीच भिन्नताएं लेखन की स्वतंत्र प्रकृति के लिए एक स्पष्ट प्रमाण हैं। वे एक प्रमाण हैं कि सुसमाचार तथ्यात्मक और विश्वसनीय हैं। प्रत्येक चार सुसमाचार एक अलग दृष्टिकोण से यीशु की एक सच्चाई प्रस्तुत करते हैं, लेकिन वे सभी एक ही कहानी बोलते हैं। और, वे सभी एक दूसरे के साथ सहमति में हैं। इस प्रकार, भिन्नताएं पूरक हैं, विरोधाभासी नहीं।

चार सुसमाचारों की सावधानीपूर्वक और निष्पक्ष परीक्षा के बाद, हम पाते हैं कि वे ईश्वर के सत्य के सामंजस्यपूर्ण साक्ष्य हैं। ऐतिहासिक तथ्य, भविष्यद्वाणी के तथ्य और कथा लेख यीशु मसीह के राजा दाऊद के पुत्र, मनुष्य के पुत्र, मसीहा और ईश्वर के पुत्र के रूप में एक पूर्ण और सत्य चित्र प्रस्तुत करते हैं।

 

परमेश्वर की सेवा में,
BibleAsk  टीम

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