परमेश्वर ने मूसा को वादा किए गए देश में प्रवेश करने की अनुमति क्यों नहीं दी?

Total
10
Shares

This answer is also available in: English العربية Français Español

प्रश्न: परमेश्वर ने मूसा को वादा किए गए देश में प्रवेश करने की अनुमति क्यों नहीं दी?

उत्तर: मूसा को वादा किए गए देश में प्रवेश करने की अनुमति नहीं थी क्योंकि एक घटना थी जिसमें उसने परमेश्वर के निर्देशों का पालन नहीं किया था। आइए हम गिनती 20:8-12 में पढ़ते हैं:

उस लाठी को ले, और तू अपने भाई हारून समेत मण्डली को इकट्ठा करके उनके देखते उस चट्टान से बातें कर, तब वह अपना जल देगी; इस प्रकार से तू चट्टान में से उनके लिये जल निकाल कर मण्डली के लोगों और उनके पशुओं को पिला। यहोवा की इस आज्ञा के अनुसार मूसा ने उसके साम्हने से लाठी को ले लिया। और मूसा और हारून ने मण्डली को उस चट्टान के साम्हने इकट्ठा किया, तब मूसा ने उससे कह, हे दंगा करनेवालो, सुनो; क्या हम को इस चट्टान में से तुम्हारे लिये जल निकालना होगा? तब मूसा ने हाथ उठा कर लाठी चट्टान पर दो बार मारी; और उस में से बहुत पानी फूट निकला, और मण्डली के लोग अपने पशुओं समेत पीने लगे। परन्तु मूसा और हारून से यहोवा ने कहा, तुम ने जो मुझ पर विश्वास नहीं किया, और मुझे इस्त्राएलियों की दृष्टि में पवित्र नहीं ठहराया, इसलिये तुम इस मण्डली को उस देश में पहुंचाने न पाओगे जिसे मैं ने उन्हें दिया है।

मूसा का पाप क्या था?

मूसा ने परमेश्वर की सीधी आज्ञा की उलंघना की। परमेश्वर ने उसे चट्टान से बात करने की आज्ञा दी। इसके बजाय, मूसा ने अपनी छड़ी के साथ चट्टान पर प्रहार किया। मूसा ने लोगों के साथ अपने व्यवहार में ईश्वर के धैर्य की अनदेखी की, जिसे उसके स्वयं के दृष्टिकोण और आचरण में प्रतिबिंबित होना चाहिए था।

उसने चमत्कार का श्रेय परमेश्वर के देने के बजाए खुद को दिया, “क्या हम(मूसा और हारून का जिक्र करते हुए) को इस चट्टान में से तुम्हारे लिये जल निकालना होगा?” (पद 10)।

इस्राएल के सामने पाप किया-आज्ञा उल्लंघन का सार्वजनिक उदाहरण दिया।

मूसा और हारून दोनों को ईश्वर में विश्वास की कमी थी, जो इस तथ्य में प्रतिबिंबित होता है कि ईश्वर ने उन्हें बताया: “तुम ने जो मुझ पर विश्वास नहीं किया …” (गिनती 20:12)। उनकी सजा यह थी कि उन्हें वादा किए गए देश में प्रवेश करने की अनुमति नहीं हुई( गिनती 20:12)।

लेकिन, परमेश्वर यह नहीं भूल पाया कि मूसा इस घटना से पहले उसके प्रति कितना वफादार था। इसलिए, उसकी दया में, उसने मूसा को एक निजी पुनरुत्थान दिया (यहूदा 9) और उसे स्वर्ग ले गया।

परमेश्वर की दया

बाद में, मूसा एलियाह के साथ रूपांतरण के पर्वत पर यीशु को दिखाई दिया (जो स्वर्ग में जीवित ले जाया गया था – 2 राजा 2:11)। ” और उनके साम्हने उसका रूपान्तर हुआ और उसका मुंह सूर्य की नाईं चमका और उसका वस्त्र ज्योति की नाईं उजला हो गया। और देखो, मूसा और एलिय्याह उसके साथ बातें करते हुए उन्हें दिखाई दिए।”(मत्ती 17:2,3)।

इस कहानी में, हम अपने बच्चों के साथ व्यवहार करने में न्याय और परमेश्वर की दया दोनों को देखते हैं।

 

परमेश्वर की सेवा में,
BibleAsk  टीम

This answer is also available in: English العربية Français Español

Subscribe to our Weekly Updates:

Get our latest answers straight to your inbox when you subscribe here.

You May Also Like

स्वर्ग और पृथ्वी जब अभी तक नहीं बने थे तो परमेश्वर कहाँ था?

This answer is also available in: English العربية Français Españolउत्पत्ति पृथ्वी और मनुष्यों की सृष्टि के बारे में बताती है “आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की”…

परमेश्वर ने हमें जो उपहार दिए हैं, उनके बारे में बाइबल क्या कहती है?

This answer is also available in: English العربية Français Españolपरमेश्वर ने हमें जो उपहार दिए हैं, उनके बारे में बाइबल क्या कहती है? “क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर…