Answered by: BibleAsk Hindi

Date:

जब यीशु ने कहा कि सिद्ध बनो तो उसका क्या अर्थ था?

यीशु ने शब्दों के द्वारा पहाड़ी उपदेश को समाप्त किया, इसलिये चाहिये कि तुम सिद्ध बनो, जैसा तुम्हारा स्वर्गीय पिता सिद्ध है॥ मत्ती (5:48)

यूनानी में सिद्ध शब्द का अर्थ

इस पद में यूनानी शब्द टेलीओआई या सिद्ध का उपयोग एक निष्कलंक बलिदान-संबंधी बलि या एक परिपक्व वयस्क का वर्णन करने के लिए किया गया है। यीशु यहाँ पर इस जीवन में पूर्ण पापहीनता को सम्बोधित नहीं करते हैं। क्योंकि पवित्रीकरण एक प्रगतिशील कार्य है। अपेक्षाकृत सिद्ध शब्द, पूर्णता,सत्यनिष्‍ठा, ईमानदारी,लेकिन एक तुलनात्मक अर्थ में दर्शाता है। वह व्यक्ति जो परमेश्वर की द्रृष्टि में सिद्ध है वह मनुष्य है जो दिए गए किसी भी समय विकास की उस सीमा तक पहुँच गया हो जिसकी स्वर्ग  अपेक्षा करता हो।

पहाड़ी उपदेश में, यीशु ने स्वर्ग के राज्य की वयवस्था(पद 21–47) के उच्च, आत्मिक आवेदन के अपने छह उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होंने सिखाया कि ये आंतरिक विचार और प्रेरणाएं हैं जो चरित्र की सिद्धता निर्धारित करते हैं, और केवल बाहरी कार्य नहीं। मनुष्य बाहरी रूप को देख सकता है, लेकिन परमेश्वर हृदय को देखता है (1 शमूएल 16: 7)।

यहूदी अपने स्वयं के प्रयासों से धर्मी बनने, अच्छे कामों से उद्धार पाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे। लेकिन अपनी विधिवादिता( नियमों की निष्ठा) में, उन्होंने अपना ध्यान व्यवस्था की पत्री के विवरणों पर केंद्रित किया। और इस प्रक्रिया में उन्होंने इसकी भावना को खो दिया (मत्ती 23:23)। लेकिन व्यवस्था का उद्देश्य परमेश्वर के प्रति सर्वोच्च प्रेम और मनुष्यों के प्रति आत्म-त्यागी प्रेम था (मत्ती 22:34-40)।

इब्रानी में सिद्ध शब्द का अर्थ

इब्रानी शब्द टैम यूनानी के टेलिओस के बराबर है, जिसे अक्सर नए नियम में सिद्ध अनुवाद किया है, लेकिन जिसका श्रेष्ठ अनुवाद “पूर्ण विकसित” या “परिपक्व” (1 कुरिन्थियों 14:20) है। इब्रानी शब्द टैम, जो अय्यूब 1:1 में सिद्ध के रूप में अनुवाद  किया है, के कई तरह के उपयोग हैं। यह शब्द, या इसके साधित शब्द में से एक का उपयोग उत्पत्ति 17:1 में किया गया है, जहाँ परमेश्वर ने अब्राहम को “सिद्ध” होने के लिए कहा था और सभी इस्राएल को “सिद्ध होने” का निर्देश दिया था जैसा कि  व्यवस्थाविवरण 18:13, 2 शमूएल 22:33, और भजन संहिता 101: 2,6। इस अर्थ में, भविष्यद्वक्ता अब्राहम धर्मी था (उत्पत्ति 15: 6)। इसके अलावा, लूका की पुस्तक में जकर्याह और उसकी पत्नी, इलीशिबा के बारे में बताया गया है कि वे धर्मी, और परमेश्वर को सम्मान देने वाले लोग थे (लूका 1: 6)।

स्पष्टतः, तब, अय्यूब 1:1 और लूका 1:6 में इब्रानी शब्दों का उपयोग उन लोगों का वर्णन करने के लिए किया है, जो अपनी क्षमता के अनुसार परमेश्‍वर की आज्ञाओं का पालन करने का प्रयास कर रहे हैं। उस अर्थ में, पौलुस “वे जो सिद्ध हैं” (1 कुरिन्थियों 2:6) और “जितने सिद्ध हैं” (फिलिप्पियों 3:15) के बारे में बोलता है। साथ ही, उसे एहसास होता है कि उन्नति पाने के लिए नई ऊँचाइयाँ हैं और वह स्वयं अत्यंत सिद्धता तक नहीं पहुँच पाया है। अय्यूब, अब्राहम, जकर्याह और इलीशिबा परमेश्वर के प्रति अपनी निष्ठा और भक्ति में सीधे, उचित और सही  थे। इस प्रकार, परमेश्वर की कृपा और सामर्थ से लोग इस पृथ्वी पर धर्मी बन सकते हैं (फिलिप्पियों 4:13)।

परमेश्वर की सेवा में,
BibleAsk  टीम

This post is also available in: English (अंग्रेज़ी) العربية (अरबी)

More Answers: